31 दिसम्बर की रात बेंगलुरु में जो हुआ वो शर्मनाक था और जो अबू आज़मी ने कहा वो तो नार्मल था एकदम. हम सभी जो बेंगलुरु पर गुस्से में हैं जानते हैं कि ये नहीं बदलने वाला और क्या कितने ही अबू आज़मी हमारे चारों ओर नहीं घूम रहे?

“ऑटो में बैठते ही नंबर मेसेज कर देना “

“अकेले जा रही है?”

“ अरे इतनी रात में अकेले न निकला कर”

“तुझपे भरोसा है, ज़माने पर नहीं“

हाँ तो ये जो जमाना है न, यहाँ ढेर सारे अबू आज़मी घूम रहे हैं. कोई दोस्त फ़ोन कर जब किसी लड़की के बारे में पूछता है

“ मैंने उस लड़की को तेरे फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में देखा, अपने यार से शादी की बात चल रही है, यार लड़की ठीक तो है न ?

“ठीक मतलब?”

“ठीक मतलब समझ रही है न, ड्रिंक व्रिंक तो नहीं करती, smoke वैगेरह”

ऐसा कहते वो फ़ोन के दूसरी ओर स्मोक कर रहा होगा, तो इस किस्म के अबू आज़मी तो हम सब के बीच बैठे हैं.कोई लड़की ऑफिस से लेट हो जाती है निकलने में, कपड़े भी माशाल्लाह ढके हुए पहनी है पर एक सुनसान गली से जाते हुए थोड़ा डर उसे भी लगता है क्यूंकि उसे पता है कि किसी अबू आज़मी की एंट्री होगी और क्यूंकि ज़माना ख़राब है तो वह पूछ कुछ न कुछ कहेगा “आइटम,माल,चलना है क्या “ पर ऐसा तो होता ही रहता है.

डिअर लड़कियों, तुम सब भी क्या बोरिंग पार्टी करती हो? एक अच्छी सी ड्रेस पहनी, थोड़ा मेकअप किया, सेल्फी लिया, थोड़े ड्रिंक्स और दोस्तों के साथ डांस……………..भला ये भी कोई पार्टी हुई. #NotAllMen से बचे हुये Men को देखो, ड्रिंक्स मारा, दनदनाते हुये हीरो माफिक एक पब्लिक पार्टी में घुसे,लड़कियों के साथ छेड़खानी की, जहाँ मन किया वहां उन्हें छुआ, पकड़ा, धक्का दिया  उन्हें गाली देते हुये कहा “पार्टी करती है, चल हम पार्टी कराते हैं” और हैप्पी न्यू इयर का “थ्रिल” “हाई” ले लिया.

चलिए हम #AllWomen इन #NotAllMen से बचे #Men से सीखें पार्टी कोड ऑफ़ कंडक्ट क्यूंकि इन अबू आज़मीयों से भरा पड़ा ज़माना बहुत ख़राब है, हम में से कोई सेफ नहीं, न ऑफिस जाती हुई लड़की, न मेट्रो में पार्टी करती हुई लड़की और न मजदूरी करती वो गाँव की लड़की.

#WeAllWomen are unsafe, ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है. एक शिस्क्षित समाज में, सो कॉल्ड सभ्य शहर में अगर “Fun” का मतलब यह है तो इससे भयावह कुछ नहीं हो सकता. और उसके लिये आप सब जिम्मेदार हैं. अब peppar स्प्रे को भी शर्म आ रही है.

#NotAllMen ट्रेंड करने से कुछ नहीं होगा, अपने बेटों को सिखाइए कि कंसेंट नाम की भी एक चीज़ होती है, अपने बेटों को सिखाइए कि शराब, सिगरेट  भी ये जस्टिफाई नहीं करता . बचा लीजिये इस घिन से हर बेटी को क्यूंकि ये मानसिकता सिर्फ एक 31st की रात भर की नहीं है. ये खोखला कर चुकी है हमें.

Author Bio

Dr. Pooja Tripathi

Is a doctor turned writer. Working in the social sector in the state of Bihar, she strongly believes in the power of communication to bring about a change. A SAARC Youth Icon for her social work, her colors include being an active blogger, passionate poet, awarded documentary maker and a solo traveler. She dreams of writing and directing films one day. And yeah don’t forget she is a chai addict and a sucker for stories.

Pooja also won our Blogstar of the Week for this post here.