नमस्कार, मैं हूँ वानखेड़े का स्कोरबोर्ड। आप मुझे हर कुछ पलों में देखते हैं, पर शायद ही कभी सोचते हैं कि मैं भी कितनी कहानियाँ अपने भीतर सँभाले खड़ा हूँ, धूप, बारिश, शोर, सन्नाटे और इनके बीच बदलते हुए अंक। एक समय था जब मुझे हाथों से चलाया जाता था। कोई सीढ़ी चढ़कर नंबर पलटता था, एक-एक रन जैसे किसी की उँगलियों से जन्म लेता था। तब हर बदलाव थोड़ा धीमा था, पर उसमें एक ठहराव था जैसे जिंदगी के पुराने दिन, जहाँ सब कुछ जल्दी नहीं, बल्कि धीरे-धीरे समझ में आता था।