फिर मिलेंगे - प्रतीक माथुर

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Create DateMay 23, 2017
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जहाँ भावनाएँ शब्दों से एक लय में मिल जाती हैं, वहाँ कविता का जन्म होता है। विश्वास करिए इस दुनिया में शब्दों और लय की कमी नहीं है, पर भावनाएँ जागृत करना कठिन है।

इस संग्रह के माध्यम से मेरी हार्दिक तमन्ना सिर्फ़ यह ही है कि अपने पाठकों का उन संवेदनाओं से फिर से परिचय करवा सकूँ जिनसे इस भावहीन संसार में मिलना दूभर हो गया है। यदि मेरी एक कविता भी आपको किसी व्यक्ति या समय या परिस्थिति की याद दिलवा पायी और किसी मार्मिक लगाव की ओर ले गयी, तो मेरा लेखन सफल हो जाएगा।

परंतु यदि ऐसा नहीं हुआ तो, फिर मिलेंगे !

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