खेतड़ी के उस छोटे से घर का आँगन बड़ा नहीं था, पर उसमें मानो दुनिया समाई हुई थी। सुबह की पहली किरण जैसे ही मिट्टी पर गिरती, आँगन चमक उठता, मानो किसी ने हल्दी से सूरज की किरणों को रंग दिया हो। वहीं कोने में तुलसी का चौरा था, जिसके पास बैठकर दादी हर रोज़ कुछ बुदबुदाती थीं। कोई समझ नहीं पाता कि वह प्रार्थना थी या.....