कावेरी के किनारे बसा गाँव कुम्भकोणम हर सुबह जैसे मुस्कुराकर उठता था। नारियल के पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप, धान के खेतों में झुकती हवा, और दूर मारीअम्मन मंदिर की घंटियाँ, सब मिलकर दिन की शुरुआत को एक उत्सव बना देते थे। इसी गाँव में दो दोस्त थे, शिवा और राघवन। दोनों की जोड़ी पूरे गाँव में मशहूर थी। अगर एक हँसता तो दूसरा ज़ोर से हँसता; अगर एक काम करता तो दूसरा बिना बुलाए साथ लग जाता।