भारत में डिप्रेशन को इससे जुड़ा शर्म, मिथक और अवैज्ञानिक सोच अधिक ख़तरनाक बनाते हैं! याद रहे कि दो-चार दिन के दुःख, सदमे, एंग्जायटी, तनाव, व्याकुलता को डिप्रेशन नहीं कहते! ये लक्षण तो किसी में भी दिख सकते हैं! डिप्रेशन के 9 लक्षण होते हैं और उनमें से कम से कम 5 लक्षणों के लगातार, बिना नागा किये, दो हफ़्तों से ज़्यादा बने रहने पर ही डिप्रेशन कहा जा सकता है! इसलिए ख़ुद से तय न करें कि आपको फलाना लक्षण है तो आप डिप्रेशन में हैं!