दो साल की कड़ी मेहनत के बाद आज वो दिन था, रिज़ल्ट का दिन और राजेश की उम्मीदों का दिन। घर में अजीब सी खामोशी थी। सबकी नज़रें उस लैपटॉप स्क्रीन पर टिकी थीं, जहाँ एक नंबर उनकी किस्मत तय करने वाला था। माँ चुपचाप भगवान से प्रार्थना कर रही थीं, अप्पा बार-बार घड़ी देख रहे थे, और छोटी संध्या कुछ समझ न पाने के बावजूद माहौल को महसूस कर रही थी। वैसे तो राजेश को अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल ही जाता, लेकिन उसकी जिद थी, “जाऊँगा तो सिर्फ वेल्लोर के इंजीनियरिंग कॉलेज में।”