जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है उसकी इच्छाएँ, उसके चीजों को देखने का नजरिया भी बदलता रहता है। कभी जो चीज उसे आनंद देती थी वह केवल उसकी स्मृति से ही आनंद पा पाता है। असल में जो चीज उसे आनंद देती है वह बिल्कुल बदल जाती है। ऐसे में जब अपने परफेक्ट दिन के विषय में लिखना हो तो कई तरह के ख्याल मन में आना लाजमी है। कैसा होगा मेरा परफेक्ट दिन?