Poetry in hindi on life खुशियाँ कम और अरमान बहुत है जिससे भी देखो परेशान बहुत है करीब से देखा तो निकला रेत घर दूर से देखा तो इसकी शान बहुत है कहते है सच का कोई मुकाबला नहीं मगर आज झूठ की पहचान बहुत है मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी यूँ तो कहने को इन्सान बहुत है