कृपया प्रतीक्षा करें, आप कतार में हैं….. लाउडस्पीकर की यह ठंडी, मशीन जैसी आवाज़ राघव के कानों में पिछले पैंतालीस मिनट से गूंज रही थी। वह बैंक की लाइन में खड़ा था, हाथ में फॉर्म, जेब में अधूरी उम्मीदें और दिमाग में पूरी जिंदगी का हिसाब-किताब। उसने आगे खड़े आदमी को देखा, जो हर पाँच मिनट में अपनी घड़ी देखता और फिर काउंटर की तरफ ऐसे घूरता जैसे उसकी नजरों से ही काम जल्दी हो जाएगा।