आज का दिन नानू के लिए बहुत ख़ास था, सुबह से ही कुछ अलग ही समां घर में दिख रहा था जैसे पता नहीं कोई खुशी की बात हो। रोज़ की तरह नानी सुबह-सुबह चाय की चुस्कियां ले रही थीं, और नानू की खुशी का राज तो वो भली-भांति जानती थीं, आख़िर छः महीने से जो आता था। नानू हर बार की तरह नाई की दुकान जाने की तैयारी में थे। वे बहुत सारा समय निकाल कर ही नाई की दुकान पर जाया करते, क्योंकि वहाँ लंबी लाइन होती और करीब एक घंटा तो आम बात थी।