धर्मपुर गाँव में गौरव को उसके असली नाम से लगभग कोई भी नहीं बुलाता था; अगर आप यह सोच रहे हैं कि लोग उसे इस वजह से ज्यादा इज्जत देते थे, तो ऐसा बिल्कुल नहीं था, बल्कि सच्चाई यह थी कि उसका नाम तो पूरे गाँव ने मिलकर रख दिया था, पलटू राम। पलटू राम का असली नाम गौरव था, लेकिन गाँव में यह नाम जैसे कहीं खो सा गया था, सिवाय उसके बापू के, जो आज भी उसे उसी प्यार और उम्मीद के साथ “गौरव” कहकर बुलाते थे।