किरण भागता-भागता घर आया और अपनी माँ की ओर आश्रय से देखने लगा, जैसे कुछ बताना चाहता हो। “क्या हुआ मेरे राजा बेटे को”, पूछती हुई सुनीता आटा लगाने लगी और उसी में कल की बची हुई सब्जी डाल दी। किरण ने झट से अपने स्कूल के बस्ते से एक नई किताब निकाली। किरण आगे से कुछ बोलता उससे पहले सुनीता बोल उठी “ये कहां से मिली तुझे? कोई बड़े लोग आए थे क्या? या किसी का जन्मदिन वहां मनाया गया?”।