शहर के पुराने बाज़ार में हल्की-हल्की चहल-पहल थी। सब्ज़ियों की खुशबू, दुकानदारों की आवाज़ें और बीच-बीच में मोलभाव की मीठी तकरार, सब मिलकर एक परिचित-सा संगीत रच रहे थे। इसी भीड़ में सुमन और राधा, दो पुरानी सहेलियाँ, अचानक आमने-सामने आ टकराईं। “अरे राधा! तू यहाँ?” सुमन ने मुस्कुराते हुए कहा।