गाँव में पहले कच्ची पगडंडी थी। बरसात में वह कीचड़ बन जाती, गर्मियों में धूल उड़ाती, और सर्दियों में ठंडी, सख़्त रेखा की तरह खेतों के बीच से गुजरती रहती। उसी रास्ते से लोग बाज़ार जाते, बच्चे स्कूल जाते, और शाम को लौटते वक्त धीरे-धीरे बातें करते हुए घर आते। फिर एक दिन खबर आई, गाँव में डामर की सड़क बनेगी।